Header Ads

हुई सफल कमाई महाराज भरथरी थारी भजन लिरिक्स !! भर्तृ भजन लिरिक्स !! हिंदी भजन लिरिक्स !!

 

भजन : हुई सफल कमाई महाराज भरथरी थारी  

।। दोहा ।।

चंदा सूरज चलता नहीं देखा, वध तीनी देखी वेल।
सही साधु सिमरता नहीं देखा, ये कुदरत का खेल।।

हुई सफल कमाई महाराज भरथरी थारी भजन

 हुई सफल कमाई महाराज, भरथरी ओ थारी।

मालिक के कारण जोग-फकीरी धारी, ईश्वर के कारण जोग-फकीरी धारी।।

राजा सोया महल में, पर तृष्णा जागी।
जहाँ मिला गोरखनाथ, वहीं से भरम भागी।।

हुई सफल कमाई...

राजा गया जंगल में, दे रहा हेला।
जहाँ मिला गोरखनाथ, वही बना चेला।।

हुई सफल कमाई...

राजा आया शहर में, दे रहा फेरी।
पिंगला को कहो हे मात, करो मत देरी।।

हुई सफल कमाई...

राजा गया महल में, दे रहा फेरी।
भिक्षा डालो पिंगला मात, मत करो देरी।।

हुई सफल कमाई...

रानी खड़ी महल में, तोड़ रही लटियाँ।
राजा ने एक दिन पकड़ा हाथ, क्यों तोड़ी प्रीत की गठियाँ।।

हुई सफल कमाई...

रानी खड़ी ड्योढ़ी पर, कलप रही काया।
तुम्हारे कारण गोरखनाथ ने, राज छुड़वाया।।

हुई सफल कमाई...

रानी न दो गुरु को गाली, ये रेखा न्यारी।
विधाता ने जो लिखा भाग्य में, टल नहीं सकती टारी।।

हुई सफल कमाई...

एक सुंदर शिखर के बीच, संकरी सेरी।
वहीं गाते हैं जरणा नाथ, भजन की लहरी।।

हुई सफल कमाई...


अच्छे अच्छे प्रोडक्ट खरीदने के लिए क्लिक करे 



भावार्थ / सारांश 

यह लोकभजन "हुई सफल कमाई महाराज भरथरी थारी" एक अत्यंत प्रभावशाली और भावपूर्ण गीत है, जो भारतीय लोककथा और आध्यात्मिक विरासत में गहराई से रचा-बसा है। इसमें राजा भरथरी के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ – उनका राजसी ऐश्वर्य छोड़कर वैराग्य धारण करना – संगीतमय शैली में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन न केवल धार्मिक है, बल्कि जीवन के गूढ़ रहस्यों, माया-मोह, प्रेम, पीड़ा और आत्मबोध को भी दर्शाता है।



1. आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत

भजन की शुरुआत राजा भरथरी की तृष्णा (इच्छा) से होती है। एक राजा होते हुए भी, उनके मन में अशांति है, और वह भौतिक सुखों से संतुष्ट नहीं हैं। यह दर्शाता है कि संसारिक ऐश्वर्य कभी भी आत्मा को तृप्त नहीं कर सकता। जब राजा को गोरखनाथ जैसे महान गुरु का सान्निध्य प्राप्त होता है, तो उनके अंदर का अज्ञान नष्ट हो जाता है — "जहाँ मिला गोरखनाथ, वहीं से भरम भागी।"

2. गुरु और शिष्य का सम्बन्ध

गोरखनाथ को मिलते ही राजा भरथरी को सच्चा मार्गदर्शन मिलता है और वे उनका शिष्य बन जाते हैं। यह भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को दर्शाता है, जहाँ गुरु आत्मज्ञान की राह दिखाते हैं और शिष्य माया-मोह का त्याग करके आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होता है।

3. संन्यास और भिक्षा की याचना

भरथरी अब योगी बन चुके हैं। वे अपने ही महल में, अपनी रानी पिंगला से भिक्षा माँगने जाते हैं। यह दृश्य अत्यंत विरागमय और भावनात्मक है। जहाँ कभी प्रेम, अधिकार और ऐश्वर्य था, अब वहाँ वैराग्य, संयम और संन्यास की याचना है। यह दर्शाता है कि अहंकार, मोह और सत्ता का अंत होता है, पर भक्ति और साधना शाश्वत हैं।

4. रानी पिंगला की प्रतिक्रिया

रानी पहले तो हैरान होती है, दुखी होती है, और फिर पछताती है। वह जानती है कि राजा ने जो त्याग किया है, वह किसी साधारण कारण से नहीं बल्कि आत्मज्ञान की प्रेरणा से किया है। रानी कहती है — "तुम्हारे कारण गोरखनाथ ने राज छुड़वाया।" यह उसकी आंतरिक पीड़ा और पछतावे को दर्शाता है। लेकिन राजा अब भावनाओं से परे एक योगी बन चुके हैं।

5. भाग्य और करम की रेखा

भजन का एक अंश कहता है —
"रानी मत दे गुरु ने गाली, करम रेखा न्यारी।
लिखा विधाता लेख, टरे नहीं टारी।।"

इसका अर्थ यह है कि मनुष्य चाहे जो भी कर ले, भाग्य का लेख मिटाया नहीं जा सकता। यह कर्म और भाग्य पर आधारित गहरी सोच है जो भारतीय दर्शन की विशेषता है।

6. जरणा नाथ और भजन की गूंज

भजन का अंतिम भाग हमें एक आध्यात्मिक शिखर पर ले जाता है, जहाँ जरणा नाथ जैसे संत भजन की लहरियाँ गा रहे हैं। यह आध्यात्मिक जागरण और आत्मिक प्रसन्नता का प्रतीक है। राजा भरथरी जैसे लोग अंततः उस स्तर पर पहुँचते हैं जहाँ ईश्वर और भक्ति ही जीवन का लक्ष्य बन जाते हैं।

नैतिक संदेश

इस भजन का सार है कि जीवन में यदि गुरु मिल जाए, सच्चा मार्गदर्शन मिल जाए, तो व्यक्ति राजा हो या रंक — वैराग्य और आत्मज्ञान की राह पकड़ सकता है।

  • माया, मोह, प्रेम और सत्ता क्षणिक हैं।

  • गुरु का मार्ग चिरस्थायी और मुक्तिदायक है।

  • सच्चा वैराग्य वही है जिसमें आत्मा ईश्वर में विलीन हो।

निष्कर्ष:

"हुई सफल कमाई महाराज भरथरी थारी" एक साधारण भजन नहीं, बल्कि यह एक आत्मिक क्रांति का गीत है। इसमें एक राजा के मानव से महायोगी बनने तक की यात्रा गाई गई है। यह भजन आज भी उन लोगों को प्रेरित करता है जो संसार की भीड़-भाड़ और छलावे से ऊबकर अंदर की शांति खोज रहे हैं।

No comments

Powered by Blogger.