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वीर हनुमाना अति बलवाना भजन लिरिक्स !! Veer Hanumana Ati Balwana Lyrics in Hindi !! हनुमानजी भजन लिरिक्स !!

 

वीर हनुमाना अति बलवाना – भजन लिरिक्स

(Veer Hanumana Ati Balwana Lyrics in Hindi)

वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ॥


जो कोई आवे, अरज लगावे,
सबकी सुनियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ॥


बजरंग बाला, फेरू थारी माला,
संकट हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ॥


ना कोई संगी, हाथ की तंगी,
जल्दी हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ॥


अर्जी हमारी, मर्ज़ी तुम्हारी,
कृपा करियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ॥


रामजी का प्यारा, सिया का दुलारा,
संकट हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ॥


वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ॥



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हनुमान जी की भक्ति और सेवा का महत्त्व

हनुमान जी को हिंदू धर्म में भक्ति, सेवा, बल और समर्पण का आदर्श स्वरूप माना जाता है। वे भगवान श्रीराम के परम भक्त, संकटों के संहारक और धर्म के रक्षक हैं। उनकी भक्ति और सेवा न केवल अध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है, बल्कि जीवन में साहस, संयम और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा भी देती है।


हनुमान जी की भक्ति का महत्त्व:

  1. निष्काम भक्ति का आदर्श:
    हनुमान जी की भक्ति पूर्णतः निःस्वार्थ और समर्पित थी। उन्होंने श्रीराम की सेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था, न कोई पुरस्कार की कामना की, न ही स्वर्ग की इच्छा।

  2. एकाग्रता और श्रद्धा का प्रतीक:
    उन्होंने अपने मन, वचन और कर्म से केवल राम नाम का स्मरण किया। यह दर्शाता है कि जब भक्ति एकाग्र होती है, तो साधक कोई भी असंभव कार्य कर सकता है।

  3. रामकाज में जीवन समर्पित:
    राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहां विश्राम” – यह दोहा दर्शाता है कि जब तक प्रभु राम का कार्य अधूरा है, हनुमान जी को विश्राम स्वीकार नहीं।

  4. भक्ति से शक्ति की प्राप्ति:
    हनुमान जी का जीवन यह सिखाता है कि जब भक्त अपने आराध्य के चरणों में समर्पित होता है, तब उसे असीम शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

      सेवा का महत्त्व हनुमान जी के जीवन में:

  1. सेवा में ही सुख:
    हनुमान जी ने जीवनभर श्रीराम की सेवा को ही सर्वोपरि माना। उन्होंने बिना थके, बिना रुके हर संकट में प्रभु और भक्तों की सहायता की।

  2. सच्ची सेवा – बिना अहंकार:
    उन्होंने कभी अपनी शक्ति या चमत्कारों पर घमंड नहीं किया। यह सिखाता है कि सेवा का भाव तभी पूर्ण होता है जब उसमें विनम्रता हो।

  3. श्रम और समर्पण का संगम:
    चाहे समुद्र पार करना हो या संजीवनी लाना — हर सेवा में उनका परिश्रम और निष्ठा दोनों अद्वितीय थे।

निष्कर्ष (Conclusion):

हनुमान जी की भक्ति और सेवा हमें सिखाती है कि जब हम निस्वार्थ भाव से अपने आराध्य और समाज के प्रति समर्पित होते हैं, तो जीवन में हर कठिनाई, हर संकट को पार कर सकते हैं। उनकी भक्ति से हमें श्रद्धा, सेवा से समर्पण, और उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त होती है।

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