रामा रामा रटते रटते - भजन लिरिक्स ,ram bhajan lyrics !!
रामा रामा रटते रटते - भजन लिरिक्स
(एक भावपूर्ण भजन – शबरी की भक्ति)
रामा रामा रटते रटते,
बीती री उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥१॥
मैं तो शबरी नारी अबला,
न भजन विधि, न पूजा ।
राम नाम में प्रीत लगा ली,
बस तेरी ही है सूझा ॥
तेरे नाम में ही हर पल,
गूँजे मेरी गड़रिया ॥
रामा रामा रटते रटते…॥
रोज सुबह वन में जाकर,
मीठे बेर चुनाऊँ ।
प्रभु तुम्हारी आस लगाए,
हर दिन भोग लगाऊँ ॥
सच्चे प्रेम की थाली लेकर,
बैठी हूँ पथरिया ॥
रामा रामा रटते रटते…॥
श्यामल तन, मृदु मुस्कान तुम्हारी,
मन मंदिर में बसाई ।
प्रेम सुधा की धार लगाकर,
आँखों में छवि समाई ॥
तेरे पावन दर्शन को ही,
तरसे मेरी नजरिया ॥
रामा रामा रटते रटते…॥
अब क्या तुमने भूल गए हो,
दासी की यह बाती?
जिसने केवल नाम तुम्हारा,
अपनी जीवन साथी ॥
तू ही तू है, हर सांसों में,
राम नाम ही पगरिया ॥
रामा रामा रटते रटते…॥
नाथ तुम्हारे दर्शन की प्यास,
जलती ज्यों अंगारा ।
तरसे दोऊ नैना मेरे,
हर पल तेरा सहारा ॥
दया करो अब प्रभु मेरे,
भर दो मन की झरिया ॥
रामा रामा रटते रटते…॥
रामा रामा रटते रटते,
बीती री उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥६॥
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भावार्थ संक्षेप में:
यह भजन शबरी की रामभक्ति का अद्भुत चित्रण है। शबरी, जो एक वनवासी स्त्री थी, प्रभु श्रीराम के दर्शन की प्रतीक्षा में अपने जीवन का प्रत्येक क्षण उन्हें समर्पित कर देती है। वह जानती है कि उसे ना वेद पता है, ना पूजन की विधियाँ — बस भक्ति है, प्रेम है, प्रतीक्षा है। राम नाम ही उसका जीवन बन गया है। वह हर दिन मीठे बेर चुनकर राम के भोग के लिए रखती है, क्योंकि उसे विश्वास है कि एक दिन उसके राम अवश्य आएँगे।
यह भजन हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में जात-पात, ज्ञान-अज्ञान, अमीरी-गरीबी कुछ मायने नहीं रखती — यदि प्रेम सच्चा हो, तो प्रभु स्वयं चलकर आ जाते हैं।
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