ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने भजन लिरिक्स !! bhole natha bhajan lyrics !!
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने – भजन लिरिक्स
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दोहा
मैं हिमाचल की बेटी,मेरा भोला बसे काशी
सारी उमर तेरी सेवा करुँगी,बनकर तेरी दासी।
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया।। (3 बार)
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने,
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भजन का शीर्षक:
यह भजन भगवान शिव की महिमा और उनके डमरू की दिव्य ध्वनि के प्रभाव को दर्शाता है। डमरू केवल एक वाद्य नहीं, बल्कि सृष्टि की चेतना का प्रतीक है — और जब स्वयं भोलेनाथ उसे बजाते हैं, तो सम्पूर्ण ब्रह्मांड रोमांचित हो उठता है।
दोहा का भावार्थ:
"मैं हिमाचल की बेटी, मेरा भोला बसे काशी,
सारी उमर तेरी सेवा करूँगी, बनकर तेरी दासी।"
यह दोहा देवी पार्वती की भावनाओं को प्रकट करता है, जो शिवजी की अर्धांगिनी हैं। वह स्वयं को हिमाचल (पर्वतराज) की पुत्री कहती हैं, और गौरव से कहती हैं कि उनका प्रिय भोलेनाथ काशी (वाराणसी) में निवास करते हैं। वह संकल्प लेती हैं कि जीवन भर वह शिवजी की सेवा करेंगी — समर्पण की पराकाष्ठा।
मुखड़ा का भावार्थ:
"ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने, सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया।"
शिवजी का डमरू केवल एक वाद्य नहीं बल्कि योग, तांडव और सृष्टि के उद्गम का प्रतीक है। जैसे ही भोलेनाथ ने डमरू बजाया, उनके निवास स्थान कैलाश पर्वत की प्रत्येक शिला, पेड़, पशु-पक्षी और देवता सब आनंदित हो गए। यह उस दिव्यता का संकेत है जो शिव से प्रवाहित होती है — वह केवल योगी ही नहीं, जगद्गुरु हैं।
प्रथम अंतरा:
"डमरू को सुनकर जी कान्हा जी आए,
कान्हा जी आए संग राधा भी आए,
वहाँ सखियों का मन भी मगन हो गया..."
द्वितीय अंतरा:
"डमरू को सुनकर जी गणपति चले,
गणपति चले संग कार्तिक चले..."
शिवजी के पुत्र — गणेश (सिद्धिविनायक) और कार्तिकेय (युद्ध के देवता) भी उस डमरू ध्वनि से आकर्षित होकर चल दिए। यह परिवारिक समरसता का भी प्रतीक है — जहाँ पिता की वाणी (या संगीत) से पुत्र भी आनंदित हो जाते हैं। अम्बे (देवी पार्वती) का मन भी आनंदित हुआ — यह मातृत्व का उल्लास है।
तृतीय अंतरा:
"डमरू को सुनकर जी रामा जी आए,
रामा जी आए संग लक्ष्मण जी आए,
मैया सिता का मन भी मगन हो गया..."
यहाँ भगवान राम (मर्यादा पुरुषोत्तम) और लक्ष्मण भी शिव के डमरू की ध्वनि से प्रभावित होकर आए। राम शिव के अनन्य भक्त माने जाते हैं। यह पंक्तियाँ उनके गहरे संबंध को दर्शाती हैं। जब ऐसे भक्त उपस्थित हों तो सीता माता का मन भी प्रसन्न होता है — यह दर्शाता है कि जब धर्म और भक्ति एकत्र होते हैं तो उत्सव की अनुभूति होती है।
चतुर्थ अंतरा:
"डमरू को सुनकर के ब्रह्मा चले,
यहाँ ब्रह्मा चले, वहाँ विष्णु चले..."
शिव का डमरू केवल प्रेम के देवताओं या भक्तों को ही नहीं, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और पालक विष्णु को भी आकर्षित करता है। यह दर्शाता है कि शिव की शक्ति, उनके तांडव और डमरू की ध्वनि में ऐसी आध्यात्मिक ऊंचाई है कि त्रिदेवों में भी रोमांच भर जाए। यहाँ लक्ष्मी माता के मन के प्रसन्न होने से यह भी दिखता है कि सुख, वैभव और शांति शिव की उपस्थिति में खिल उठते हैं।
पंचम अंतरा:
"डमरू को सुनकर जी गंगा चले,
गंगा चले वहाँ यमुना चले..."
गंगा जो शिवजी की जटाओं में निवास करती हैं, वह भी उनकी डमरू ध्वनि से लहराते हुए आनंद में झूम उठती हैं। उनके साथ यमुना और सरयू भी, जो भक्ति की प्रमुख नदियाँ हैं, मग्न हो जाती हैं। यह संकेत है कि जब परमात्मा प्रकट होते हैं, तब प्रकृति और जलधाराएं भी नृत्य करती हैं।
षष्ठ अंतरा:
"डमरू को सुनकर जी सूरज चले,
सूरज चले वहाँ चंदा चले,
सारे तारों का मन भी मगन हो गया..."
अब दृश्य आकाश में जाता है। सूर्य, चंद्रमा और तारे — ब्रह्मांडीय तत्व भी शिव के डमरू के आकर्षण से खिंचकर आ जाते हैं। यह अध्यात्मिक संकेत है कि शिव का संगीत केवल पृथ्वी पर नहीं, आकाश, नक्षत्रों और सम्पूर्ण सृष्टि की चेतना को छू लेता है।
अंतिम पंक्तियाँ और समग्र भाव:
"ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया..."
यह पंक्तियाँ बार-बार दोहराई जाती हैं, ताकि यह बात हृदय में उतर जाए कि शिव की तांडव ध्वनि केवल संगीत नहीं है — यह प्रेम,
शांति, ऊर्जा, चेतना, भक्ति और ब्रह्मांड की गति का प्रतीक है।
सारांश रूप में भावार्थ:
यह भजन केवल शिव के डमरू वादन की सराहना नहीं है — यह दर्शाता है कि परमात्मा के स्पंदन में जब ध्वनि जन्म लेती है, तो पूरी सृष्टि उसका नृत्य बन जाती है।
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गोकुल से कैलाश तक,
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अयोध्या से वैकुण्ठ तक,
- पृथ्वी से ब्रह्मलोक तक,
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सागर से आकाश तक,
हर स्थान पर आनंद, उल्लास और एकता की अनुभूति होती है।
यह भजन समरसता, आध्यात्मिक शक्ति और सभी धर्मों, पंथों एवं देवी-देवताओं की एकता का भी प्रतीक है। हर कोई शिव की तान से झूमता है — यह शिव की विराटता को दर्शाता है। डमरू की ध्वनि हमें याद दिलाती है कि संगीत और भक्ति जब साथ होते हैं, तो ब्रह्मांड में आनंद की बाढ़ आ जाती है।




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