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मन रे राम भजन करिये भजन लिरिक्स !! man re ram bhajan kariye bhajan lyrics !! kabir das bhajan lyrics !!

भजन : मन रे राम भजन करिये

माला वर्ष पचास री, सत्संग की पल एक,
तोई बराबर तुले नहीं, सुखदेव कियो विवेक।

सत्संग घर-घर नहीं, नहीं घर-घर गजराज,
सिंह का टोला नहीं, नहीं चंदन को बाग।


 भजन

सत री संगत रा मातम सुणिये

राम सभा तुम करिये,
शूरवीरों रा एही है लक्षण,
समझ-समझ पग धरिये मन 
राम भजन तुम करिये।

हरि भजन रे कारणे,
मिनखा देह धरी है मन 
राम भजन तुम करिये।

एकल रंगा, एकल वरणा,
एकता घाट घडिये,
तपधारी रा देख तमाशा,
खम्मा-खम्मा कराइये मन 
राम भजन तुम करिये।

सत री संगत रा मातम सुणिये

हरि भजन रे कारणे

मिनखा देह धरी है मन 

राम भजन तुम करिये


सोनो-चांदी पर्दे रखिये,
लोहा चौक धरिये,
काम पड़े झगड़े में जावो,
शूरवीरों से अड़िये मन 
राम भजन तुम करिये।

हरि भजन रे कारणे,
मिनखा देह धरी है मन 
राम भजन तुम करिये।

दया, गरीबी और आधीनता 
पापी तो सब रूलिये,
पुरख दास सन्तों रे चरणे,
भवसागर सूं तिरिये मन 
राम भजन तुम करिये।

हरि भजन रे कारणे,
मिनखा देह धरी है मन 
राम भजन तुम करिये।


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