भजन राम गुण गायले रे मनवा जब तक सुखी शरीर लिरिक्स !! Bhajan Lyrics !!
Bhajan Lyrics
**दोहा**
"रामा थारे नाम री, मोड़ी पड़ी रे पहचान कई जन्म बीता बाल पणा में, कई जन्म बीता अजाण"
राम गुण गायले रे मनवा, जब तक सुखी शरीर हरि गुण गायले रे मनवा,
भाग भला जाने सतगुरु मिलिया, पड़ियो समंद में शीर हंसा हो चुग लीजिये रे,
एक नाम अमोलक हीर हरि गुण गायले रे मनवा,
अवसर जाय दिनों दिन बित्यो, ज्यो अंजलि रो नीर फेर न हंसलो आवासी रे,
इण मान सरोवर तीर हरि गुण गायले रे मनवा,
जोवन थाका भज लीजिये जी, देर न करियो वीर फेर बुढ़ापो आवासी रे,
थारे पिंड में व्यापे पीर हरि गुण गायले रे मनवा,
सब देवा रो देव रमय्यो, सब पीरो रो पीर कहत कबीर भज लीजिये जी,
साहिब सुख ही शीर हरि गुण गायले रे मनवा,
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"राम गुण गायले रे मनवा, जब तक सुखी शरीर" एक लोकप्रिय भजन है जो हमें यह संदेश देता है कि जब तक हमारा शरीर स्वस्थ और सक्षम है, हमें भगवान के गुणों का गान करना चाहिए। यह भजन मुख्य रूप से राजस्थानी भाषा में गाया जाता है और इसके बोल इस प्रकार हैं:
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि हमें अपने जीवन के स्वस्थ समय में भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि बुढ़ापे या बीमारी में यह संभव नहीं हो पाता।


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